मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति/अर्थव्यवस्था में सुधार और मुद्रास्फीति वृद्धि तथा मौद्रिक नीति


मुद्रास्फीति में आ रही तेजी की समस्या से निपटने के लिए केंद्रीय बैक ने 20 अप्रैल को घोषित 2010-11 की वार्षिक मौद्रिक नीति में कई नीतिगत दरों-रेपो और रिवर्स रेपो दरों में वृध्दि कर दी। ऐसा दो महीनों में दो बार किया गया। सी आर आर में भी बढ़ोत्तरी की गई ताकि बैंकिंग प्रणाली से अतिशेष नकदी को खींचा जा सके। रेपो और रिवर्स रेपो दरों में 0.25% और सी आर आर में भी 0.25% की वृध्दि की गई है ताकि बैंकिंग प्रणाली से एक खरब 25 अरब रुपए निकाले जा सकें। नीतिगत दरों में वृध्दि से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत निहित है। रेपो दर अब 5.25% होगी, जबकि रिवर्स रेपो दर 3.76% रहेगी। अप्रैल 24 से प्रभावित होने वाला सीआरआर अब बढ़कर 6% हो जाएगा। इससे पूर्व जनवरी में तिमाही समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने सी आर आर में 0.75% की वृध्दि कर 5.75% कर दिया था ताकि बैकिंग प्रणाली से 3 खरब 75 अरब रूपए की तरलता को सोखा जा सके।

नीति की घोषणा के बाद रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. डी. सुब्बाराव ने उचित ही कहा कि वे छोटे-छोटे कदम उठाना अधिक पसंद करेंगे। अर्थव्यवस्था के लिए यहीं बेहतर है, क्योंकि नीतिगत दरों और सी आर आर में अधिक वृध्दि से मुद्रास्फीति में तो कमी लाई जा सकती थी, परन्तु इससे विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता, जबकि अब इसमें गति पकड़ने के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।