• ‘वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी’ (Wadia Institute of Himalayan Geology- WIHG) के अनुसार, ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-दिल्ली’ (National Capital Region-Delhi- NCR Delhi) में हाल ही में आए भूकंप के झटकों की श्रृंखला असामान्य नहीं है और इस क्षेत्र में मौज़ूद तनाव ऊर्जा (Strain Energy) की और संकेत करती है।

WIGH संस्थान ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग’ (Department of Science & Technology- DST) के तहत एक स्वायत्त संस्थान है। WIGH द्वारा दिल्ली-एनसीआर को दूसरे उच्चतम भूकंपीय खतरे वाले क्षेत्र (ज़ोन IV) के रूप में पहचाना गया है।

  • भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्टता हेतु ‘सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार’ के लिये नामांकन आमंत्रित किये हैं। व्यक्ति या संस्थान जिसने भी आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है वे अपना नामांकन 31 अगस्त, 2020 तक www.dmawards.ndma.gov.in पर अपलोड कर सकते हैं।

प्रत्येक वर्ष 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर इन पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में व्यक्तियों एवं संस्थानों द्वारा किये गए उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देने के लिये ‘सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार’ की शुरूआत की है। इस पुरस्कार के रूप में एक प्रमाण पत्र के साथ एक संस्थान के लिये 51 लाख रुपए एवं एक व्यक्ति के लिये 5 लाख रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाता है। एक व्यक्ति पुरस्कार के लिये स्वयं आवेदन कर सकता है या अन्य व्यक्ति या संस्थान को नामित कर सकता है। नामांकित व्यक्ति या संस्था को आपदा प्रबंधन के किसी भी क्षेत्र जैसे- रोकथाम, बचाव, प्रतिक्रिया, राहत, पुनर्वास, अनुसंधान, नवाचार या प्रारंभिक चेतावनी में संलग्न होना चाहिये।

  • 23 अप्रैल, 2020 को दक्षिण एशियाई मौसमी जलवायु आउटलुक फोरम (South Asian Seasonal Climate Outlook Forum- SASCOF) ने दक्षिण एशिया में आगामी दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य बारिश होने की उम्मीद जताई है।

SASCOF अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान और म्यांमार सहित दक्षिण एशियाई देशों के मौसम विज्ञानियों एवं हाइड्रोलॉजिकल विशेषज्ञों का एक संघ है। इसे विश्व मौसम विज्ञान संगठन(WMO) के समर्थन से वर्ष 2010 में स्थापित किया गया था। इसमें शामिल देश क्षेत्रीय पूर्वानुमान जारी करने के लिये सामूहिक रूप से काम करते हैं और प्रत्येक वर्ष दक्षिण-पश्चिम एवं उत्तर-पूर्व मानसून से संबंधित पूर्वानुमान जारी करते हैं। अफगानिस्तान जो उत्तर-पश्चिम में स्थित है, को छोड़कर ये सभी दक्षिण एशियाई देश दक्षिण-पश्चिम मानसून की तरह सामान्य मौसम एवं जलवायवीय संबंधी विशेषताओं का सामना करते हैं। SASCOF को एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित किया गया था जहाँ म्यांमार के साथ दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (South Asian Association of Regional Cooperation- SAARC) के सदस्य देशों के मौसम विज्ञानी सामान्य मौसम एवं जलवायु से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। SASCOF के कार्य: यह क्षेत्रीय पैमाने पर आम सहमति वाली एक मौसमी जलवायु संबंधी सूचना तैयार करता है जो राष्ट्रीय स्तर के आर्थिक दृष्टिकोण तैयार करने के लिये आधार प्रदान करते हैं।

  • COVID- 19 महामारी के चलते देश में लगाए गए 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन को दृष्टिगत रखते हुए गृह मंत्रालय ने राज्यों को राजमार्गों पर तत्काल राहत शिविर लगाने तथा नियमित चिकित्सा जाँच के आदेश दिये हैं।

मंत्रालय ने राज्यों को श्रमिकों एवं बेघर लोगों के लिये अस्थायी आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सा देखभाल आदि का प्रबंधन करने तथा राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष का उपयोग करने के लिये अधिकृत किया है।

गृह मंत्रालय ने COVID- 19 महामारी को 'अधिसूचित आपदा' (Notified Disaster) के रूप में मानने का फैसला किया है।

इसके अलावा मंत्रालय ने राज्यों को शिविरों में लोगों को प्रदत्त सुविधाओं, ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ के तहत प्रदत राहत पैकेज आदि के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिया है। महत्त्व: इस कदम के बाद राज्य सरकारें SDRF अधिसूचित आपदाओं के लिये उपलब्ध SDRF निधि का उपयोग COVID- 19 महामारी के प्रबंधन में कर सकेंगे। SDRF को अगले वित्त वर्ष के लिये पहले से ही लगभग 29,000 करोड़ का आवंटन किया जा चुका है।

राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) की स्थापना ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम’2005 की धारा 48 (1) (a) के तहत किया गया है।
SDRF राज्य सरकार के पास उपलब्ध प्राथमिक निधि होती है जो अधिसूचित आपदाओं के प्रति तत्काल प्रतिक्रिया करने तथा राहत प्रदान करने के व्यय को पूरा करने में काम आती है।
केंद्र सरकार द्वारा वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार, दो समान किश्तों में निधि जारी की जाती है।
केंद्र, सामान्य श्रेणी के राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिये SDRF आवंटन में 75% और विशेष श्रेणी राज्यों (पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर) के लिये 90% योगदान देता है।

SDRF में अधिसूचित आपदाएँ: चक्रवात, सूखा, भूकंप, आग, बाढ़, सुनामी, ओलावृष्टि, भूस्खलन, हिमस्खलन, मेघ प्रस्फुटन, कीट हमला, तुषार तथा शीत लहर।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority) ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत गठित भारत में आपदा प्रबंधन के लिये एक सर्वोच्च निकाय है। यह आपदा प्रबंधन के लिये नीतियों, योजनाओं एवं दिशा-निर्देशों का निर्माण करने के लिये ज़िम्मेदार संस्था है, जो आपदाओं के वक्त समय पर एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा इस प्राधिकरण की अध्यक्षता की जाती है।

  • भारतीय वायु सेना (Indian Air Force- IAF) ने ‘ऑपरेशन संजीवनी’ (Operation Sanjeevani) के माध्यम से आवश्यक दवाइयों तथा अस्पताल के उपयोग संबंधी 6.2 टन सामग्री को मालदीव पहुँचाया। दवाइयों तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं को भारत में आठ आपूर्तिकर्ताओं से खरीदा गया था, लेकिन COVID- 19 महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के कारण किसी अन्य माध्यम से इन्हे मालदीव ले जाना संभव नहीं हो सकता था।

मालदीव की सरकार के अनुरोध पर, वायुसेना ने ‘ऑपरेशन संजीवनी’ प्रारंभ किया तथा परिवहन विमान C-130J के माध्यम से मालदीव की उड़ान से पहले नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और मदुरै में हवाई अड्डों से इन दवाओं को एयर-लिफ्टिंग की। कुछ समय पूर्व ही भारत ने सेना के 14-सदस्यीय मेडिकल दल को एक वायरल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिये मालदीव भेजा था। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा मालदीव को 5.5 टन आवश्यक दवाएँ उपहार के रूप में भेंट की गईं। सरकार की अन्य पहल: COVID- 19 महामारी पर कार्य कर स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा से संबंधित उपकरणों का आयात करने में भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों की मदद करने के लिये भी भारत सरकार ने कदम उठाए हैं। इसके लिये भारत सरकार ने एयर इंडिया की शंघाई तथा हांगकांग कार्गो उड़ान संचालित करने के लिये चीन से मंज़ूरी प्राप्त कर ली है।

ऑपरेशन नीर (Operation Neer):- 04 सितंबर 2014 को माले (मालदीव) को अपने मुख्य RO प्लांट के खराब होने से गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। संयंत्र के पुनः चालू होने तक शहर को प्रतिदिन केवल 100 टन पानी के साथ निर्वाह करना पड़ रहा था।

मालदीव सरकार के अनुरोध पर, भारतीय वायुसेना ने तीन C-17 तथा तीन IL- 76 विमानों को दिल्ली से अराक्कोनम (Arakkonam) तथा उसके बाद माले तक एयरलिफ्ट करने के लिये तैनात किया गया। 05-07 सितंबर के बीच, IAF ने माले को 374 टन पीने के पानी की आपूर्ति की।

ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus):

3 नवंबर, 1988 की रात को भारतीय वायु सेना ने मालदीव के लिये इस अभियान को शुरू किया। मालदीव द्वारा भाड़े के आक्रमणकारियों (Mercenary Invasion) के खिलाफ सैन्य मदद की अपील करने पर IAF के IL-76s, An- 2s, An-32s ने त्रिवेंद्रम से मालदीव के लिये उड़ान भरी, जबकि IAF मिराज 2000s द्वारा आसपास के द्वीपों पर निगरानी की गई। इस ऑपरेशन ने भारतीय वायुसेना की सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता को प्रदर्शित किया।

ऑपरेशन राहत (Operation Rahat):

अरब बलों के गठबंधन (Coalition Arab Forces) ने मार्च 2015 में यमन में हवाई हमले शुरू कर दिये। ऐसे में यमन के विभिन्न स्थानों पर फँसे 4000 से अधिक भारतीय नागरिकों को तत्काल निकाले जाने की आवश्यकता थी। भारतीय नागरिकों की निकासी के लिये विदेश मंत्रालय, भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना और एयर इंडिया की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन को पूरा करने पर कार्य किया।

आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund)’

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सरकार ने COVID-19 महामारी द्वारा उत्पन्न किसी भी प्रकार की आपातकालीन या संकटपूर्ण स्थिति से निपटने हेतु इस कोष की स्थापना की है। PM-CARES Fund एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट (Public Charitable Trust) है जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री है। अन्य सदस्यों के रूप में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं। कोष में राशि की सीमा निर्धारित नही की गई है जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग योगदान करने में सक्षम होंगे। कोष आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मज़बूत एवं नागरिकों की सुरक्षा हेतु अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा।

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी के तहत योगदान (Corporate Social Responsibility-CSR)

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) ने स्पष्ट किया है कि PM-CARES Fund में CSR के तहत कंपनियों को योगदान देना अनिवार्य है। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत, CSR का प्रावधान उन कंपनियों पर लागू होता है, जिनका कुल मूल्य (Net Worth) 500 करोड़ रुपए से अधिक हो या कुल कारोबार (Turnover) 1000 रुपए करोड़ से अधिक हो या शुद्ध लाभ (Net Profit) 5 करोड़ रुपए से अधिक हो। CSR के तहत उपरोक्त कंपनियों को अपने पिछले तीन वर्षों के शुद्ध लाभों के औसत का 2% योगदान करना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के बारे में (Prime Minister’s National Relief Fund)

पाकिस्तान से विस्थापित लोगों की मदद करने के लिये जनवरी, 1948 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अपील पर जनता के अंशदान से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की स्थापना की गई थी। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की धनराशि का इस्तेमाल अब प्रमुखतया बाढ़, चक्रवात और भूकंप आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिजनों तथा बड़ी दुर्घटनाओं एवं दंगों के पीड़ितों को तत्काल राहत पहुँचाने के लिये किया जाता है। इसके अलावा, हृदय शल्य-चिकित्सा, गुर्दा प्रत्यारोपण, कैंसर आदि के उपचार के लिये भी इस कोष से सहायता दी जाती है। यह कोष केवल जनता के अंशदान से बना है और इसे कोई भी बजटीय सहायता नहीं मिलती है। समग्र निधि को अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों तथा अन्य संस्थाओं में विभिन्न रूपों में निवेश किया जाता है। कोष से धनराशि प्रधानमंत्री के अनुमोदन से वितरित की जाती है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष का गठन संसद द्वारा नहीं किया गया है। इस कोष की निधि को आयकर अधिनियम के तहत एक ट्रस्ट के रूप में माना जाता है और इसका प्रबंधन प्रधानमंत्री अथवा विविध नामित अधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय प्रयोजनों के लिये किया जाता है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष को आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10 और 139 के तहत आयकर रिटर्न भरने से छूट प्राप्त है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के अध्यक्ष होते हैं और अधिकारी/कर्मचारी अवैतनिक आधार पर इसके संचालन में उनकी सहायता करते हैं। प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में किये गये अंशदान को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 (छ) के तहत कर योग्य आय से पूरी तरह छूट हेतु अधिसूचित किया जाता है।

भारत में टिड्डी दल का हमला

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एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के एक दर्जन से अधिक देशों में टिड्डी दल (locust swarms) ने फसलों पर हमला किया है। संयुक्त राष्ट्र संघ का मानना है कि तीन क्षेत्रों यथा-अफ्रीका का हॉर्न क्षेत्र, लाल सागर क्षेत्र, और दक्षिण-पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद चिंताजनक है। अफ्रीका का हॉर्न क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है। इथियोपिया और सोमालिया से टिड्डी दल दक्षिण में केन्या और महाद्वीप के 14 अन्य देशों में पहुँच चुके हैं। लाल सागर क्षेत्र में सऊदी अरब, ओमान और यमन पर टिड्डियों के दल ने हमला किया है, तो वहीँ दक्षिण पश्चिम एशिया में ईरान, पाकिस्तान और भारत में टिड्डियों के झुंडों ने फसल को भारी नुकसान पहुँचाया है। भारत में राजस्थान, गुजरात और पंजाब के सीमावर्ती गाँवों में भारी मात्रा में टिड्डियों के झुंड आ चुके हैं, जिससे खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुँचा है। प्रभावित राज्य की सरकारों को टिड्डी हमलों के विरुद्ध उच्च सतर्कता बरतने के लिये लगातार परामर्श दिया जा रहा है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में आतंक मचाने के बाद टिड्डियों का दल उत्तर प्रदेश के झांसी पहुँच गया है। कृषि विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, यह दल लगभग एक किलोमीटर के इलाके में फैला हुआ है। टिड्डियों के हमले की आशंका के मद्देनज़र दमकल वाहनों को पहले से ही तैयार किया गया था और इन कीटों को भगाने के लिये कीटनाशकों का गहन छिड़काव किया जा रहा है।

टिड्डी दल मुख्यतः टिड्डी एक प्रकार के उष्णकटिबंधीय कीड़े होते हैं जिनके पास उड़ने की अतुलनीय क्षमता होती है जो विभिन्न प्रकार की फसलों को नुकसान पहुँचाती हैं। टिड्डियों की प्रजाति में रेगिस्तानी टिड्डियाँ (Schistocerca gregaria) सबसे खतरनाक और विनाशकारी मानी जाती हैं। आमतौर पर जुलाई-अक्तूबर के महीनों में इन्हें आसानी से देखा जा सकता है क्योंकि ये गर्मी और बारिश के मौसम में ही सक्रिय होती हैं। अच्छी बारिश और परिस्थितियाँ अनुकूल होने की स्थिति में ये तेज़ी से प्रजनन करती हैं। उल्लेखनीय है कि मात्र तीन महीनों की अवधि में इनकी संख्या 20 गुना तक बढ़ सकती है। भारत में टिड्डियों की प्रजाति भारत में टिड्डियों की निम्निखित चार प्रजातियाँ पाई जाती हैं:

  1. रेगिस्तानी टिड्डी (Desert Locust)
  2. प्रवासी टिड्डी ( Migratory Locust)
  3. बॉम्बे टिड्डी (Bombay Locust)
  4. ट्री टिड्डी (Tree Locust)

रेगिस्तानी टिड्डियों को दुनिया के सभी प्रवासी कीट प्रजातियों में सबसे खतरनाक माना जाता है। इससे लोगों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण और आर्थिक विकास पर खतरा उत्पन्न होता है। ये व्यवहार बदलने की अपनी क्षमता में अपनी प्रजाति के अन्य कीड़ों से अलग होते हैं और लंबी दूरी तक पलायन करने के लिये बड़े-बड़े झुंडों का निर्माण करते हैं। सामान्य तौर पर ये प्रतिदिन 150 किलोमीटर तक उड़ सकते हैं। साथ ही 40-80 मिलियन टिड्डियाँ 1 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में समायोजित हो सकती हैं। एक अकेली रेगिस्तानी मादा टिड्डी 90-80 दिन के जीवन चक्र के दौरान 60-80 अंडे देती है।

वर्ष 1950 के बाद टिड्डियों का ऐसा हमला पहली बार देखने को मिल रहा है। दशकों पहले टिड्डी प्लेग (जब दो से अधिक निरंतर वर्षों के लिये टिड्डियों के झुंड का हमला होता है, तो इसे प्लेग कहा जाता है) के भयानक रूप को लंबे समय तक देखा गया था। इस बार, वे अच्छे मानसून के कारण लंबे समय तक इस क्षेत्र में मौज़ूद हैं।

वर्ष 2019 में मानसून पश्चिमी भारत में समय से पहले (जुलाई के पहले सप्ताह से छह सप्ताह पहले) शुरू हुआ, विशेषकर टिड्डियों से प्रभावित क्षेत्रों में। यह सामान्य रूप से सितंबर/अक्टूबर माह के बजाय एक माह आगे नवंबर तक सक्रिय रहा। विस्तारित मानसून के कारण टिड्डी दल के लिये उत्कृष्ट प्रजनन की स्थितियाँ पैदा हुई। इसके साथ ही प्राकृतिक वनस्पति का भी उत्पादन हुआ, जिससे वे लंबे समय तक भोजन के लिये आश्रित रह सकती थीं।

टिड्डियों और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध

रेगिस्तानी टिड्डे आमतौर पर अफ्रीका के निकट, पूर्वी और दक्षिण-पश्चिम एशिया के अर्ध-शुष्क और शुष्क रेगिस्तान तक सीमित होते हैं, जो वार्षिक रूप से 200 मिमी से कम बारिश प्राप्त करते हैं। सामान्य जलवायुवीय परिस्थितियों में, टिड्डियों की संख्या प्राकृतिक मृत्यु दर या प्रवासन के माध्यम से घट जाती है। कुछ मौसम विज्ञानियों का मानना है कि टिड्डियों का इस प्रकार प्रजनन, जो कृषि कार्यों के लिये चिंता का विषय है, हिंद महासागर के गर्म होने का एक अप्रत्यक्ष परिणाम है। पश्चिमी हिंद महासागर में सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव या अपेक्षाकृत अधिक तापमान पाया गया परिणामस्वरूप भारत समेत पूर्वी अफ्रीका में घनघोर वर्षा हुई। वर्षा के कारण नम हुए अफ्रीकी रेगिस्तानों ने टिड्डियों के प्रजनन को बढ़ावा दिया और वर्षा की अनुकूल हवाओं द्वारा इन्हें भारत की ओर बढ़ने में सहायता मिली। इसके अतिरिक्त कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने हेतु जारी लॉकडाउन के कारण कीटनाशकों का बेहतर ढंग से छिड़काव न हो पाने के कारण भारत, पाकिस्तान और अफग़ानिस्तान में नियमित समन्वय गतिविधियों को प्रभावित किया। बचाव की बेहतर तैयारी कैसे? जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक घटना है, अफ्रीका महाद्वीप अपनी सुभेद्यता के कारण टिड्डी दल के हमले में विवश नज़र आ रहा है। अफ्रीकी हॉर्न देश मुख्य रूप से सामाजिक आर्थिक विकास के निम्न स्तर पर स्थित हैं। यहाँ शोध कार्य को बढ़ावा देना चाहिये ताकि टिड्डियों के हमले से पूर्व व्यापक बचाव किया जा सके। रेगिस्तानी टिड्डी झुंडों को नियंत्रित करने के लिये ऑर्गोफॉस्फेट रसायनों (organophosphate chemicals) का छिड़काव किया जा सकता है। यह छिड़काव उन क्षेत्रों में करना चाहिये जहाँ कृषि कार्य नहीं किये जा रहे हैं क्योंकि यह एक विषाक्त रसायन है। फसलों पर क्लोरपाइरीफॉक्स (Chlorpyri Fox) रसायन का छिड़काव किया जाना चाहिये क्योंकि यह विषाक्त रसायन नहीं है। टिड्डियों के द्वारा दिये गए अंडों को नष्ट कर देना चाहिये। कृषि क्षेत्र के आस-पास खाईयाँ (Trenches) खोद कर अपरिपक्व टिड्डियों को जल और केरोसीन के मिश्रण में गिराया जा सकता है। ड्रोन आदि का प्रयोग कर उनके प्रजनन स्थलों पर कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिये। टिड्डी चेतावनी संगठन (Locust Warning Organization-LWO) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare) के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय (Directorate of Plant Protection, Quarantine & Storage) के अधीन आने वाला टिड्डी चेतावनी संगठन मुख्य रूप से रेगिस्तानी क्षेत्रों राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में टिड्डियों की निगरानी, ​​सर्वेक्षण और नियंत्रण के लिये ज़िम्मेदार है। इस संगठन का प्रमुख कार्य निगरानी करना, सर्वेक्षण करना तथा टिड्डी दल के किसी भी प्रकार के हमले को नियंत्रित करना है। इस संगठन के दो मुख्यालय हैं- फरीदाबाद- यह संगठन के प्रशासनिक कार्यों की देखरेख करता है। जोधपुर- यह संगठन के तकनीकी कार्यों की देखरेख करता है।

मौसम और उसका पूर्वानुमान

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  • भारत सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम की पहलों को आगे बढ़ाने के लिये केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय’ने ‘उमंग’ (UMANG) एप पर ‘भारत मौसम विज्ञान विभाग’ से संबंधित सूचनाएँ भी प्रदान करनी शुरू की हैं।
उमंग मोबाइल एप्लीकेशन पर IMD की निम्नलिखित सात सेवाओं को ऑन-बोर्ड किया गया है।
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सेवाएँ विवरण
वर्तमान मौसम की स्थिति इसमें 150 नगरों के लिये वर्तमान तापमान, आर्द्रता, हवा की गति एवं दिशा को दिन आठ बार अपडेट किया जाता है।

सूर्योदय/सूर्यास्त तथा चंद्रमा के उगने/डूबने के बारे में भी सूचना दी जाती है।

नाऊकास्ट (Nowcast) IMD के राज्य मौसम विज्ञान विभाग केंद्रों द्वारा देश के लगभग 800 स्टेशनों के लिये स्थानीय मौसम की घटनाओं तथा उनकी तीव्रता के बारे में अगले तीन घंटे की चेतावनी जारी की जाती है।

गंभीर मौसम की स्थिति में जारी की गई चेतावनी में इसके प्रभावों को भी शामिल किया जाता है।

नगर पूर्वानुमान भारत के लगभग 450 नगरों के मौसम की स्थितियों के बारे में पिछले 24 घंटों तथा अगले 7 दिन के पूर्वानुमान दिये जाते हैं।
वर्षा की सूचना ‘अखिल भारतीय ज़िला वर्षा सूचना’ को दैनिक, साप्ताहिक, मासिक एवं संचयी श्रृंखला के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।
पर्यटन पूर्वानुमान भारत के लगभग 100 पर्यटन नगरों की मौसम की स्थिति को पिछले 24 घंटों एवं 7 दिन के पूर्वानुमान के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।
चेतावनी • नागरिकों को आने वाले खतरनाक मौसम की चेतावनी देने के लिये अलर्ट जारी किया जाता है।

• इसे लाल, नारंगी एवं पीले रंग के अलर्ट स्तर में कोड किया जाता है जिसमें लाल रंग सबसे गंभीर श्रेणी है। • आने वाले पाँच दिन के लिये सभी ज़िलों हेतु दिन में दो बार इसे जारी किया जाता है।

चक्रवात • तूफान की चेतावनी एवं अलर्ट,तूफान के तटों से गुजरने के संभावित समय और बिंदुपथ के द्वारा चक्रवाती तूफान का ट्रैक उपलब्ध कराता है।

• चक्रवात के प्रभाव के आधार पर क्षेत्रवार/ज़िलेवार चेतावनियाँ जारी की जाती हैं जिससे कि संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों की निकासी सहित उपयुक्त तैयारी संभव हो सके।

भारतीय प्रधानमंत्री ने नागरिकों तक एक ही मोबाइल एप के माध्यम से प्रमुख सरकारी सेवाओं को पहुँचाने के लिये वर्ष 2017 में उमंग (UMANG) एप लॉन्च किया था। उमंग (UMANG) का पूर्ण रूप ‘नए युग के शासन के लिये एकीकृत मोबाइल एप्लिकेशन’ (Unified Mobile Application for New-age Governance) है।

यह भारत सरकार का ऑल-इन-वन सिंगल,एकीकृत,सुरक्षित,मल्टी-चैनल,मल्टी-प्लेटफॉर्म,बहुभाषी,मल्टी सर्विस मोबाइल एप है जो केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न संगठनों की महत्त्वपूर्ण सेवाओं की सुविधा प्रदान करता है।

वर्तमान में इस एप के माध्यम से केंद्र सरकार के 127 विभागों एवं 25 राज्यों की लगभग 600 सेवाएँ और लगभग 180 उपयोगी बिल भुगतान सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं और कई अन्य सेवाओं को अभी जारी किया जाना बाकी है।

वर्तमान में एंड्रॉइड, iOS, वेब एवं KaiOS आधारित उमंग (UMANG) उपयोगकर्त्ताओं की संख्या 2.1 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

नागरिक उमंग एप के माध्यम से अपने डिजिलॉकर (Digilocker) तक पहुँच सकते हैं और ‘रैपिड असेसमेंट सिस्टम’ (RAS) के माध्यम से किसी भी सेवा का लाभ उठाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं जिसे उमंग (UMANG) के साथ एकीकृत किया गया है। पिछले कुछ समय से ‘नाऊ कास्ट’ के माध्यम से मौसम विभाग ने अब कुछ घंटे पहले के मौसम की भविष्यवाणी करना आरंभ कर दिया है। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों में हाल के वर्षों में सुधार देखा गया है। अभी मध्यम अवधि की भविष्यवाणियाँ जो 15 दिन से एक महीने की होती हैं, 70-80 फीसदी तक सटीक निकलती है।

आपदा प्रबंधन में मानव-केंद्रित संकल्पना

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भारतीय प्रधानमंत्री ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ हुई टेलीफोन वार्ता पर फ्राँस में महामारी के कारण हुई मौतों पर शोक व्यक्त किया। फ्राँस के राष्ट्रपति ने, भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा COVID- 19 महामारी को इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानने वाले दृष्टिकोण पर दृढ़ता से सहमति व्यक्त की तथा बताया कि COVID- 19 महामारी से निपटने के लिये वैश्वीकरण के युग में हमें एक नवीन मानव-केंद्रित अवधारणा की आवश्यकता है।

हाल ही में आयोजित 'G- 20 वर्चुअल समिट' में भारतीय प्रधानमंत्री बताया कि महामारी, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिये सिर्फ आर्थिक पक्ष ही नहीं बल्कि मानवीय पहलुओं में भी सहयोग की आवश्यकता है।

दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने सहमति जताई कि जलवायु परिवर्तन जैसी अन्य वैश्विक समस्याएँ समग्र मानवता को प्रभावित करती है, अत: इनमें अधिक मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है। सामाजिक दूरी (Social Distancing) की व्यावहारिकता: हाल में लॉकडाउन के दौरान लागू ‘सामाजिक दूरी’ का दुनिया भर के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा समर्थन किया गया तथा उनका मानना है कि कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने का केवल यही एक तरीका है। जबकि कुछ बुद्धिजीवियों का मानना है कि सामाजिक दूरी की अवधारणा अप्रत्यक्ष रूप से सामाजिक पूर्वाग्रहों को बढ़ावा दे सकती है। इसे हम निम्नलिखित देशों के उदाहरणों से समझ सकते हैं- कोरिया: दक्षिण कोरिया में COVID- 19 महामारी की शुरुआत एक विवादास्पद चर्च से मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस चर्च में आने वाले अनुयायियों के बीच वुहान से दक्षिण कोरिया तक लगातार यात्रा के कारण COVID- 19 का प्रसार हुआ। नतीजतन, महामारी की शुरुआत में सभी आधे से अधिक मरीज़ इस धर्मिक आंदोलन से संबंधित थे, जो कि कोरियाई आबादी का 1% से भी कम है। सामाजिक दूरी ने इस धार्मिक समुदाय को जो पहले से कोरियाई समाज के हाशिये पर है और अधिक खराब स्थिति में ला दिया है। ईरान: ईरान में विशेष परिस्थितियों के कारण यह पश्चिम एशिया में COVID-19 का एक प्रमुख हॉट स्पॉट बन गया है। यह अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के कारण चीन के साथ संबंध विकसित करने के लिये मजबूर था, ऐसे में ईरानी व्यापारी जिसने वुहान की व्यापारिक यात्रा की, ईरान में कथित तौर पर प्रथम COVID- 19 रोगी माना गया। ईरान में रोग संचरण का प्रारंभिक केंद्र कॉम (Qom) नामक धार्मिक स्थल था, जो शिया मुसलमानों के लिये एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है। ईरान में COVID- 19 का अगला केंद्र ईरानी संसद था, जिसका ईरानी समाज के आध्यात्मिक केंद्र कॉम के साथ मज़बूत संबंध थे। सभी सांसदों में से 8% अर्थात 23 सांसद 3 मार्च तक इस महामारी से संक्रमित थे। सामाजिक दूरी ईरान में विशेष रूप से सत्ताधारी अभिजात वर्ग के बीच सामाजिक अभिवादन के लोकप्रिय रूपों के विपरीत थी। ईरान में इस महामारी के प्रत्येक मामले में वैश्वीकरण तथा अंतर्राष्ट्रीय पहलुओं से जोड़ा गया तथा राजनीतिक व धार्मिक प्रक्रियाओं ने इन मामलों को ओर तेज़ करने का कार्य किया। श्रीलंका तथा भारत: भारत और श्रीलंका में COVID- 19 महामारी की शुरुआत पर्यटन तथा श्रम प्रवास से मानी जाती है जो बहुत कुछ वैश्वीकरण के साथ जुड़ी हुई हैं। श्रीलंका तथा केरल की एक बड़ी श्रम शक्ति विदेशों में कार्यरत हैं। इन श्रमिकों के विदेश से आगमन ने दक्षिण एशियाई देशों में COVID- 19 महामारी के प्रसार में योगदान दिया है। उदाहरण के लिये श्रीलंका में 15 मार्च तक COVID- 19 के 18 रोगियों में 11 (61%) इटली से आने वाले श्रीलंकाई श्रमिक थे। आगे की राह: इस प्रकार, COVID- 19 महामारी को, विशेष रूप से दक्षिण विश्व के देशों में वैश्वीकरण की बुराई के रूप में देखा जा सकता है। सामाजिक दूरी अब तक इतनी कारगर नहीं रही क्योंकि श्रमिक तथा उनके परिवार अक्सर दो अलग-अलग राज्यों में रह रहे होते हैं, तथा दोनों स्थानों पर इन परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हमें एक सैन्य शैली लॉकडाउन तथा सामाजिक दूरी से परे सोचने तथा दक्षिण विश्व में महामारी से निपटने में वैश्वीकरण से उत्पन्न समस्याओं के समाधान की आवश्यकता है। स्रोत: द हिंदू

  • राष्ट्रीय मानसून मिशन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।

इसका मुख्य उद्देश्य मानसूनी वर्षा के अनुमान हेतु अत्याधुनिक भविष्यवाणी प्रणाली विकसित करना है। इसके लिये IITM,NCEP- National Centres for Environmental Prediction जैसे संगठनों का सहयोग लिया जा रहा है। इस मिशन के निष्पादन और समन्वय की ज़िम्मेदारी भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM),पुणे की है।

अन्य आपदाओं का प्रबंधन

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  • बिम्सटेक आपदा प्रबंधन अभ्यास (BIMSTEC Disaster Management Exercise)

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (National Disaster Response Force- NDRF) बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-ऑपरेशन आपदा प्रबंधन अभ्यास के दूसरे संस्करण की मेजबानी ओडिशा में करेगा। इस अभ्यास की थीम ‘एक सांस्कृतिक विरासत स्थल जो भूकंप और बाढ़ या तूफान से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है’ है। इस अभ्यास का उद्देश्य मुख्य प्राकृतिक आपदा के दौरान अधिसूचना, तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रियाओं के लिये मौजूदा आपातकालीन प्रक्रियाओं का परीक्षण करना है। इस अभ्यास में बिम्सटेक के सदस्य देशों में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्याँमार और नेपाल भाग ले रहे हैं जबकि अन्य दो सदस्य देश भूटान तथा थाईलैंड अभ्यास में भाग नहीं ले रहे हैं।

उष्णकटिबंधीय चक्रवात और उसका प्रबंधन

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उष्ण कटिबंधीय चक्रवात निर्माण की अनुकूल स्थितियाँ:

  1. बृहत् समुद्री सतह;
  2. समुद्री सतह का तापमान 27° सेल्सियस से अधिक हो;
  3. कोरिआलिस बल का उपस्थित होना;
  4. लंबवत पवनों की गति में अंतर कम होना;
  5. कमज़ोर निम्न दाब क्षेत्र या निम्न स्तर का चक्रवातीय परिसंचरण होना;
  6. समुद्री तल तंत्र पर ऊपरी अपसरण।
  • उष्णकटिबंधीय तूफान 'क्रिस्टोबाल' (Cristobal) मेक्सिको में लैंडफॉल करने के बाद धीरे-धीरे अंतर्देशीय भागों की ओर बढ़ रहा है, जिससे दक्षिणी मेक्सिको तथा अमेरिका के कुछ हिस्सों के प्रभावित होने की संभावना है। यह तूफान पूर्वी प्रशांत महासागर में उत्पन्न उष्णकटिबंधीय तूफान अमांडा (Tropical Storm Amanda) के अधिविष्ट (किसी तूफान की समाप्ति के पूर्व की अवस्था) भाग से बना है। यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि 'अमांडा' तूफान के कारण हाल ही में अल सल्वाडोर और ग्वाटेमाला में कम-से-कम 17 लोग मारे गए थे।

उष्णकटिबंधीय तूफान क्रिस्टोबाल का निर्माण मेक्सिको की खाड़ी में हुआ है।

क्रिस्टोबाल तूफान की विशेषताएँ:-तूफान की अवस्थिति: मेक्सिको से 15 मील की दूरी पर;

वायु की सामान्य गति: 50 मील प्रति घंटे; वर्षा की संभावना: 25 से 50 सेंटीमीटर तक; चक्रवातों का निर्माण व समाप्ति:-चक्रवातों को ऊर्जा संघनन प्रक्रिया द्वारा ऊँचे कपासी स्तरी मेघों से प्राप्त होती है। समुद्रों से लगातार आर्द्रता की आपूर्ति से ये तूफान अधिक प्रबल होते हैं। चक्रवातों के स्थल पर पहुँचने पर आर्द्रता की आपूर्ति रुक जाती है जिससे ये क्षीण होकर समाप्त हो जाते हैं। वह स्थान जहाँ से उष्ण कटिबंधीय चक्रवात तट को पार करके जमीन पर पहुँचते हैं चक्रवात का लैंडफॉल कहलाता है।

उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की दिशा प्रारंभ में पूर्व से पश्चिम की ओर होती है क्योंकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करती है। लेकिन लगभग 20° अक्षांश पर ये चक्रवात कोरिओलिस बल के प्रभाव के कारण दाईं ओर विक्षेपित हो जाते हैं तथा लगभग 25° अक्षांश पर इनकी दिशा उत्तर-पूर्वी ही जाती है। 30° अक्षांश के आसपास पछुआ हवाओं के प्रभाव के कारण इनकी दिशा पूर्व की ओर हो जाती है।
  • 'भारत मौसम विज्ञान विभाग' ने महाराष्ट्र तथा गुजरात में ‘चक्रवात निसर्ग’ के कारण खराब मौसम की चेतावनी जारी की है। भारत के मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ के लिये ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। IMD ने विक्षोभ को वर्तमान में (Depression) अवदाब के रूप में वर्गीकृत किया है। हालाँकि अवदाब की तीव्रता में लगातार वृद्धि हो रही है तथा यह लगातार उत्तर तथा उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है।

वर्तमान में अवदाब का केंद्र अरब सागर में मुंबई तट के 630 किमी. दक्षिण-पश्चिम में है।

IMD ने इन क्षेत्रों में तेज़ हवाओं; जिन्हे ‘गेल विंड’ (Gale Wind) भी कहा जाता है, की चेतावनी जारी की है । गेल विंड की गति 34-47 नॉट के बीच होती है। 1 नॉट, 1.85 किमी प्रति घंटे के बराबर होता है। IMD द्वारा मौसम से संबंधित चेतावनी देने के लिये रेड अलर्ट, ऑरेंज अलर्ट, येलो अलर्ट और ग्रीन अलर्ट को जारी किया जाता है। इन अलर्ट को मौसम के खराब होने की तीव्रता के आधार पर जारी किया जाता है।
  1. हवा की गति 130 किमी./घंटा से अधिक होती है तो IMD द्वारा ‘रेड अलर्ट’ जारी किया जाता है और प्रशासन से ज़रूरी कदम उठाने के लिये कहा जाता है। इस प्रकार की चेतवानी जारी करने का आधार एकमात्र वायु की गति नहीं है।
  2. वायु की गति लगभग 65 से 75 किमी. प्रति घंटा होती है और 15 से 33 मिमी. तक तीव्र बारिश होने की संभावना रहती है।
  3. येलो अलर्ट का प्रयोग सामान्यत: लोगों को सचेत करने के लिये किया जाता है। हालाँकि इस क्षेत्र के आपदा से प्रभावित होने की बहुत कम संभावना होती है। ‘येलो वाॅर्निंग’ तटीय क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम की संभावना से कम-से-कम 48 घंटे पूर्व जारी की जाती है।

मौसम विभाग द्वारा ग्रीन अलर्ट सामान्यत: तब जारी किया जब संबंधित क्षेत्र को आपदा से कोई खतरा नहीं होता है

  • जून 2020 में आए चक्रवात ‘अम्फान’ (Amphan) के कारण ‘सुंदरबन’ (Sunderbans) का 28% से अधिक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। लगभग 1200 वर्ग किमी. में फैले मैंग्रोव वन क्षतिग्रस्त हुए हैं। ज्यादातर क्षति दक्षिण 24 परगना के पथारप्रतिमा और कुलतली इलाकों में हुई है। भारतीय क्षेत्र में स्थित सुंदरबन को अत्यधिक क्षति हुई है, जबकि बांग्लादेश की तरफ कम क्षति हुई है। विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day- WED) के अवसर पर पश्चिम बंगाल में ‘मैंग्रोव’ और अन्य पेड़ लगाने हेतु अभियान भी चलाया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने वन विभाग को 14 जुलाई, 2020 तक मैंग्रोव के 3.5 करोड़ पौधे लगाने हेतु तैयारी करने के निर्देश दिये हैं। ‘डैम्पियर हॉजज़ लाइन’ (Dampier Hodges line) के दक्षिण में स्थित भारतीय सुंदरबन 9630 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है जिसमें से मैंग्रोव वन 4263 वर्ग किमी. में फैले हुए हैं। ‘डैम्पियर हॉजज़ लाइन’ (Dampier-Hodges line) एक काल्पनिक रेखा है जो 24 परगना दक्षिण और उत्तरी ज़िलों से होकर गुजरती है और ज्वार-भाटा से प्रभावित एश्चुअरी ज़ोन की उत्तरी सीमा को इंगित करती है। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के बाद भी क्षतिग्रस्त मैंग्रोव वन की पुनर्स्थापना में वर्षों लग सकते हैं। मैंग्रोव न केवल हवा की गति को कम करते हैं बल्कि चक्रवात के दौरान समुद्री लहरों की गति को भी कम करते हैं।

  • 25 जनवरी को दक्षिणी हिंद महासागर में मेडागास्कर में उत्पन्न चक्रवात डायने (Diane) से प्रभावित लोगों को सहायता और राहत उपलब्ध कराने के लिये भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन वनीला (Operation Vanilla) की शुरुआत की। भारतीय नौसेना के पोत आईएनएस ऐरावत को इस मिशन में लगाया गया है।

इस चक्रवात के कारण मेडागास्कर में बाढ़ एवं भूस्खलन जैसी आपदाएँ आई हैं जिनके परिणामस्वरूप कई लोगों की मृत्यु हुई और काफी लोग विस्थापित हुए हैं।

मेडागास्कर, हिंद महासागर का एक द्वीपीय देश है। यह विश्व का चौथा सबसे बड़ा द्वीप है।

भारत हिंद महासागर में अपनी सामरिक स्थिति को मज़बूत करने के लिये मेडागास्कर (Madagascar) और कोमोरोस (Comoros) को अपने हिंद महासागर विज़न में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर सेशेल्स और मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्रीय डिविज़न का हिस्सा हैं। सभी चारों द्वीप (सेशेल्स,मॉरीशस,मेडागास्कर और कोमोरोस) अफ्रीकी संघ (African Union) एवं हिंद महासागर आयोग (Indian Ocean Commission) के सदस्य हैं। मेडागास्कर, हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (Indian Ocean Rim Association- IORA) का भी सदस्य है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद मार्च 2018 में मेडागास्कर द्वीप का दौरा करने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति है। गौरतलब है कि मेडागास्कर को भारत द्वारा दी गई सहायता भारतीय नौसेना के विदेशी सहयोग पहल (Foreign Cooperation Initiatives) का हिस्सा है जो भारतीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण 'सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा और विकास- Security and Growth for all in the Region) के अनुरूप है।

आपदा प्रबंधन

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  • बेंगलुरू स्थित ‘भारतीय विज्ञान संस्थान’ (Indian Institute of Science) एवं यूके स्थित ‘यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया’ (University of East Anglia) की एक टीम ने ‘बे ऑफ बंगाल बाउंड्री लेयर एक्सपेरिमेंट’ (Bay of Benga.l Boundary Layer Experiment- BoBBLE) के तहत मानसून, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों एवं मौसम संबंधी अन्य पूर्वानुमानों की सटीक भविष्यवाणी के लिये एक ब्लूप्रिंट तैयार किया है।

मुख्य बिंदु: BoBBLE, भारत एवं यूके की एक संयुक्त परियोजना है। इस परियोजना का उद्देश्य मानसून प्रणाली पर बंगाल की खाड़ी में समुद्री प्रक्रियाओं के प्रभाव की जाँच करना है। इस परियोजना को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) एवं ब्रिटेन के ‘प्राकृतिक पर्यावरण अनुसंधान परिषद’ (Natural Environment Research Council) द्वारा वित्तपोषित किया गया है। बंगाल की खाड़ी ‘दक्षिण एशियाई ग्रीष्मकालीन मानसून प्रणाली’ को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। विशेष रूप से दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान निम्न है जिससे समुद्री वातावरण के साथ-साथ मानसून भी प्रभावित होता है। दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी की तुलना में दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी अधिक ठंडी है। दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में अधिक लवणता होने से वर्षा की संभावना कम होती है और यह ग्रीष्मकालीन मानसूनी धाराओं (Summer Monsoon Current-SMC) से प्रभावित होती है। इस परियोजना के तहत बंगाल की खाड़ी में होने वाले बदलावों का अवलोकन करने के लिये दो जहाज़, छह महासागरीय ग्लाइडर्स एवं आठ नावों को तैनात किया जाएगा। ये दोनों जहाज़ बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व में स्थापित किये जायेंगे जिससे इस क्षेत्र में हवाओं एवं समुद्री धाराओं के पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण मार्गों का पता लगाते हुए, समुद्री तापमान, लवणता एवं धाराओं का अवलोकन करेंगे।

  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने हिमाचल प्रदेश में बारिश के लिये एक पीला कोड मौसम चेतावनी जारी की है।

कलर कोडेड वेदर वार्निंग देश की शीर्ष मौसम एजेंसी (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग,पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत) द्वारा जारी किया जाता है। इसका उद्देश्य खतरनाक मौसम के बारे में लोगों को सतर्क करना है जिसमें व्यापक नुकसान या जीवन के लिये खतरा उत्पन्न करने की क्षमता होती है। हर दिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की वेबसाइट पर मौसम से संबंधित चेतावनी अपलोड की जाती है। वेबसाइट पर कलर कोडेड अलर्ट के साथ ज़िलेवार बारिश का पूर्वानुमान भी अपलोड किया जाता है और इसे रोज़ाना तीन बार अपडेट किया जाता है। चार रंग के कोड: वेबसाइट पर चेतावनी की विभिन्न श्रेणियों को इंगित करने के लिये चार रंग के कोड जारी किये जाते हैं। ये कोड निम्नलिखित हैं-

  1. लाल रंग (Red Color):-

खराब मौसम से बचने के लिये तुरंत कार्यवाही करने की आवश्यकता है। बेहद खराब मौसम की उम्मीद है। लोगों को स्वयं और दूसरों को सुरक्षित रखने के लिये कार्यवाही करने की आवश्यकता है। व्यापक क्षति, यात्रा एवं बिजली में व्यवधान और जीवन के लिये जोखिम की संभावना है। लोगों को खतरनाक क्षेत्रों में जाने से बचना चाहिये तथा आपातकालीन सेवाओं एवं स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करना चाहिये।

  1. एम्बर रंग (Amber Color):-

मौसम के खराब होने की संभावना के लिये तैयार रहने की चेतावनी जारी की जाती है। बेहद खराब मौसम की संभावना बढ़ गई है जो संभावित रूप से यात्रा में देरी, सड़क एवं रेल यातायात बंद होने और बिजली आपूर्ति में रुकावट पैदा कर सकता है। एम्बर कोड का मतलब है कि लोगों को अपनी योजनाओं को बदलने तथा अपने परिवार और समुदाय को मौसम कार्यालय से जारी पूर्वानुमान के आधार पर मौसम के गंभीर प्रभावों से बचाने के लिये तैयार रहने की आवश्यकता है। इसमें जान-माल का खतरा हो सकता है।

  1. पीला रंग (Yellow Color):-

लोगों को सतर्क करने के लिये मौसम का अध्ययन किया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में मौसम के गंभीर रूप से खराब होने की संभावना है। यात्रा में देरी हो सकती है और लोगों को दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में बाधा आने की संभावना को लेकर आगे की योजना बनाने के लिये एडवाइज़री जारी की जाती है। यह बताता है कि अगले कुछ दिनों में मौसम बदल सकता है या खराब हो सकता है।

हरा रंग (Green):

कोई कार्रवाई आवश्यक नहीं है। मौसम से संबंधित कोई गंभीर चिंता नहीं है। कोई एडवाइज़री जारी नहीं की गई है।