हिंदी कविता (आधुनिक काल छायावाद तक) सहायिका/वर दे

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वर दे


संदर्भ

वर दे कविता सुव्याख्य छायावादी कवि सूर्य कान्त त्रिपाठी निराला द्वारा रचित है।

प्रसंग

वर दे कविता में निराला जी ने सरस्वती जी की वंदना की है।

व्याख्या

कवि कहते है, हे माँ सरस्वती! हमें वरदान दीजिये। हे माँ! हम सबमें नव ज्ञान रूपी अमृत-मंत्र भर दीजिये। भारतवासियों से अंधकार रूपी बंधन को तोड दीजिए और प्रकाश रूपी ज्योत को हृदय में जगमगा दीजिए।हे माँ सरस्वती! हमारे हृदय में स्थित अंधकार की जगह प्रकाश भरकर इसे जगमग कर दीजिये। हे माँ सरस्वती! देश में प्रकाश की ऐसी धारा बहा दीजिये, जो सारी बुराइयों, पापों का नाश करने वाली हो। भारतवासी को नई गति, नई लय, नए ताल, नए छंद बादल को सम्मान प्रदान करो। आसमान के पक्षियों के नित्य को नए स्वर प्रदान करो।

विशेष

1)भाषा सरल है।

2)प्रसाद गुण विद्यमान है।

3)मां सरस्वती की वंदना की गई है।

4)भारतवासियो को प्रकाश की ओर अग्रसर करने की प्रार्थना की गई है।