मूवी-सीता रामम

कलाकार-दुलकर सलमान , मृणाल ठाकुर , रश्मिका मंदाना , तरुण भास्कर , सुमंत यालगर्डा , गौतम मेनन , भूमिका चावला , प्रकाश राज और टीनू आनंद आदि।

लेखक-हनु राघवपुडी , रुथम समर और राज कुमार कदमुडी

निर्देशक-हनु राघवपुडी

निर्माता-सी अश्विनी दत्त

रनटाइम- 2h 43m

मूल भाषा- तेलगु


फिल्म ‘सीता रामम’ दो कालखंडों में एक साथ चलती है। 1964 में शुरु हुई कहानी एक प्रेम कहानी है जिसमें रेडियो पर एक अनाथ लेफ्टिनेंट राम की वीरता की कहानी सुनकर देश भर के लोग उसे चिट्ठियां लिखने लगते हैं। इसी में एक चिट्ठी सीतालक्ष्मी की आती है जो राम को अपना पति मानती। बातें भी सारी वह ऐसी ही लिखती है। इस के बाद राम का जीवन जैसे पूरी तरह से बदल ही जाता है। राम अपनी सीता को खोजने निकलता है। इसके बाद इस कहानी में दिखाया जाता है की केसे राम अपनी सीता को ढूंढता है और केसे उनके बीच प्यार होता है। एक और कहानी जो 1984 में शुरू होती है लंदन से। अपने बाबा की विरासत हासिल करने से पहले लंदन में पढ़ी पाकिस्तानी युवती उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने भारत आती है। उसे एक चिट्ठी मिलती है जो 20 साल पहले राम ने लिखी होती है जब वो पाकिस्तान के सेनिको द्वारा पकड़ा जाता है और उस समय वो चिट्ठी सीतालक्ष्मी तक नहीं पहुंच पाता। पाकिस्तान के मेजर अब्बु तारिक अली के देहांत के बाद वो चिट्ठी लंदन से पढ़ के आई उसकी पोती आफरीन को सीतालक्ष्मी तक चिट्ठी पहुंचना होता है।लेकिन सीतालक्ष्मी असल में कोन है ये कोई नही जानता, सीतालक्ष्मी की असल पहचान क्या है? इसका खुलासा होने के साथ ही फिल्म का पूरा ग्राफ बदल जाता है। कहानी समाज, दस्तूरों और परिवार की तंग गलियों से होकर गुजरती है।इस कहानी में कई नए मोड़ है। कई नए खुलासे है। एक नया किरदार है। समय के बितने के साथ जैसे जैसे कहानी के पन्ने पलटते है वैसे वैसे कहानी में दिलचस्पी बढ़ती जाती है।

                   ये मूवी बेहद इमोशनल और रोमांटिक है। इस मूवी के लेखक हनु राघवपुड़ी ने इस कहानी को इस तरह से लिखा है की आप इस कहानी को अपने दोस्त, परिवार, रिश्तेदार, किसी के साथ भी देख सकते है। इस कहानी में एक अद्भुत प्रेम कथा के साथ साथ हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष को भी दर्शाया गया है। इस मूवी का सबसे इमोशनल भाग इसका अंतिम भाग होता है, जो आपके आंखो में  आंसु भी ला  सकता है। इसका अंतिम भाग मुझे अत्यंत पसंद आया। इस मूवी के हर अभिनेता ने अपने किरेदार को बहुत ही अच्छे से से निभाया। ये मूवी तेलगु सिनेमा में सुपर हिट गई है और इसे हिंदी में भी डिब्ब किया गया है जो दर्शकों को काफी पसंद आया है और काफी सराहया भी गया है।
                               हनु राघवपुडी और अश्विनी दत्त ने फिल्म ‘सीता रामम’ की कल्पना एक अखिल भारतीय फिल्म के रूप में ही की है। इसमें दक्षिण से लेकर मुंबई और कोलकाता तक के कलाकारों को चुन चुनकर लिया गया है। टीनू आनंद, सचिन खेडेकर और जीशु सेनगुप्ता के साथ साथ भूमिका चावला, प्रकाश राज सब छोटे छोटे लेकिन ठोस किरदारों में नजर आए। फिल्म की खूबियों के साथ इसकी खामियों पर भी नजर डालें तो फिल्म का संगीत तेलुगू में भले सुपरहिट रहा हो, हिंदी में इन्हें डब करने की वरुण ग्रोवर से लेकर कुमार तक की कोशिशें असरदार नहीं हैं। सुस्त संपादन फिल्म ‘सीता रामम की एक और कमजोरी है। करीब दो घंटे चालीस मिनट की ये फिल्म कहीं कहीं लंबी खिंचने लगती है। इन दो कमियों को छोड़ दें तो फिल्म इस सप्ताहांत की मस्ट वॉच फिल्म है।
    • सार**: ये मूवी एक प्रेमी जोड़े के ईद गिर्द घूमती हुई दिखती है। जिसमे के राजकुमारी नूर जहा (सीता) जो एक अनाथ भारतीय सैनिक राम से प्यार कर बैठी है। ये कहानी एक चिट्ठी का सफर होता है जो राम द्वारा सीता को लिखा जाता है और ये चिट्ठी पहुंचने का काम आफरीन को दिया जाता है। ये कहानी दो कलखंडों में चलती है। इस मूवी में प्यार, दो देशों का संघर्ष, उस समय की सामाजिक स्थिति के साथ साथ सैनिकों के जीवन को भी बढ़े सुंदर और सहज तरीके से दिखिया जाता है। ये कहानी आपके दिलो पर छाप छोड़ देगी और आपके आंखो में आसू भर देगी। इस मूवी को 4.9 की रेटिंग मिली है जो ये मूवी इस रेटिंग के योग्यभी है।